संत सम्मान व अपमान का परिणाम

मैं एक शक्कर मिल में लैब केमिस्ट के पद पर कार्यरत था । मैंने पूज्य बापूजी से मंत्रदीक्षा ली है और प्रतिदिन निष्ठापूर्वक जप करता हूँ । जब पूज्य बापूजी को षड्यंत्र के तहत झूठे केस में फँसाया गया था, उस समय शक्कर मिल के लगभग 600 कर्मचारियों की वेतनवृद्धि होनेवाली थी । उनमें से 590 कर्मचारी मीडिया की झूठी खबरें सुनकर दिन-रात बापूजी के बारे में गलत-सलत बकते रहते थे । मैं उनको समझाता था, ‘किन्हीं संत के लिए अपमानजनक शब्द बोलकर आप लोग क्यों अपने लिए मुसीबत बुला रहे हो ?’ पर कोई नहीं मानता था । सरकार द्वारा वेतनवृद्धि की घोषणा हुई तो मिल में ढोल बजे, पटाखे फोड़े गये, नाच हुआ पर जब वेतन नियमावली सामने आयी तो पता चला कि वेतन मात्र 50-100 रुपये तक बढ़ा है ।

दूसरी तरफ मेरे ऊपर बापूजी की ऐसी कृपा बरसी कि पूरी मिल में केवल मेरा ही प्रमोशन हुआ और वेतन 17 हजार से बढ़कर 30 हजार हो गया । मैं कर्मचारी से अधिकारी बन गया और बाकी के लोग देखते रह गये । संत के सम्मान और अपमान का परिणाम मैंने अपनी आँखों से देखा है ।

- रोहिताश कुमार

नानौता, जि. सहारनपुर (उ.प्र.)

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