विद्यार्थियों की उन्नति का राजमार्ग : ‘ऋषि प्रसाद’

मैं आनंदीबाई डिग्री कॉलेज, बोरीवली (मुंबई) में डायरेक्टर हूँ । सन् 2003 में पूज्य बापूजी से मंत्रदीक्षा लेने के बाद मुझे बौद्धिक, मानसिक व आध्यात्मिक हर प्रकार के लाभ हुए ।

आज पश्चिमी अंधानुकरण के कारण बढ़ते अश्लीलतापूर्ण, पतनवाले वातावरण में युवाओं को सही मार्गदर्शन संत-महापुरुषों के अलावा और कोई नहीं दे सकता । इसलिए मैंने सोचा कि हर माह पूज्य बापूजी का सत्संग मेरे कॉलेज के विद्यार्थियों को मिलना चाहिए ताकि वे संयमी, संस्कृति-प्रेमी, चरित्रवान, बुद्धिमान बन अपने माता-पिता व देश का नाम रोशन करें ।

तभी मैंने सोचा कि यदि संत श्री आशारामजी आश्रम द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका ऋषि प्रसादहर माह उन तक पहुँच जाय तो विद्यार्थियों के साथ उनके पूरे परिवार को भी सर्वश्रेष्ठ मार्गदर्शन मिलेगा 

बापूजी की सत्प्रेरणा से मैं पिछले 9 वर्षों से कॉलेज में प्रवेश लेनेवाले सभी विद्यार्थियों से प्रवेश शुल्क के साथ ऋषि प्रसादका वार्षिक शुल्क 60 रु. लेकर उन्हें एक साल का सदस्य बनाती हूँ । इससे परीक्षाफल बहुत अच्छा आ रहा है । विद्यार्थियों की खान-पान की आदतों में, शिष्टाचार व आचार-व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन देखे जा रहे हैं । कॉलेज के ट्रस्टियों की राय सम्मति से यह कार्य कर रही हूँ और इससे सभी ट्रस्टी तथा बच्चों के अभिभावक भी प्रसन्न हैं । बापूजी की कृपा से मुझे प्राध्यापक से डायरेक्टर बना दिया गया है । अब मेरे अंतर्गत 7 बड़े-बड़े कॉलेज व जूनियर कॉलेज हैं ।

मैं सभी अध्यापक-प्राध्यापक वर्ग से अनुरोध करती हूँ कि हम लोग विद्यार्थियों के परीक्षा-परिणाम पर तो ध्यान दें परंतु साथ ही उनके चारित्रिक, मानसिक, बौद्धिक व आध्यात्मिक विकास पर भी ध्यान दें क्योंकि जो लौकिक शिक्षा स्कूल-कॉलेज में दी जाती है, उससे विद्यार्थी आगे चलकर केवल भौतिक सुविधाएँ एकत्रित कर सकते हैं परंतु जीवन में समता, शांति और सच्चा आनंद पाने की कला नहीं सीख पाते । फलस्वरूप अपनी सारी जिंदगी तनाव, चिंता में बिताकर हताश-निराश हो संसार से चले जाते हैं । कई युवान तो आपराधिक प्रवृत्तियों में लग जाते हैं तो कई आत्महत्या जैसा महापाप भी कर डालते हैं ।

आज देश में जो घोटाले, भ्रष्टाचार, महँगाई, बेरोजगारी, अश्लीलता मौजूद है, यह अशिक्षित व्यक्तियों का काम नहीं वरन् देश-विदेश से उच्च शिक्षा प्राप्त व्यक्तियों का काम है । विद्यार्थीकाल में इन लोगों ने भी रातभर जागकर पढ़ाई की होगी, उनके माँ-बाप ने भी उनको पैसा खर्च कर पढ़ाया-लिखाया होगा । लेकिन आखिर परिणाम क्या निकला ? अच्छी डिग्री पा ली परंतु पूज्य बापूजी जैसे संतों का उचित मार्गदर्शन नहीं है तो जिस शिक्षा को समाज व देश के उत्थान में लगाना चाहिए उसीको देश को खोखला करने में लगा रहे हैं । परंतु इसके बावजूद भी भारतवासी पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा सुखी, स्वस्थ व संयमी जीवन जी रहे हैं । यह सब बापूजी की तपस्या का फल है जो भारतवासियों को मिल रहा है ।

भारत का यह परम सौभाग्य है कि ब्रह्मज्ञानी संत श्री आशारामजी बापू 72 वर्ष की आयु में भी अपने एकांतिक समाधिक सुख को एक तरफ कर पूरे देश में सत्संग-कार्यक्रमों द्वारा ज्ञानवर्षा करके घर-घर में आध्यात्मिक क्रांति का उद्घोष कर रहे हैं और उनकी इसी ज्ञानवर्षा को अपने में सँजोये हुए है मासिक पत्रिका ॠषि प्रसाद

ऋषि प्रसादएक पारिवारिक, सामाजिक व आध्यात्मिक पत्रिका है, जिससे न केवल विद्यार्थियों को बल्कि उनके पूरे परिवार को भी सर्वश्रेष्ठ मार्गदर्शन मिलता है । इस पत्रिका द्वारा विद्यार्थियों को स्मरणशक्ति, बुद्धिशक्ति व एकाग्रता बढ़ाने के यौगिक प्रयोग, प्राणायाम, योगासन व मंत्रों द्वारा आंतरिक शक्ति बढ़ाकर सफलता के उच्च शिखरों तक पहुँचने का राजमार्ग मिलता है । साथ ही उनके अंदर संस्कृति-प्रेम, सदाचार, शिष्टाचार के संस्कार भी पड़ते हैं, जिसका परिणाम यह होता है कि उनका एसक्यू, एसआई बहुत बढ़ जाता है । आज लगभग हर बड़े इंटरव्यू में इसके अतिरिक्त अंक दिये जाते हैं क्योंकि धार्मिक व्यक्ति अधार्मिक की अपेक्षा ज्यादा ईमानदार, सहनशील, चरित्रवान, संयमी, सदाचारी व सद्गुणसम्पन्न होता है, जिसका पूरा लाभ उस कम्पनी को मिलता है जिसमें वह काम करता है ।

आज के आपाधापीवाले समय और स्वार्थी वातावरण में भी वे व्यक्ति स्वस्थ, सुखी व सम्मानित जीवन जी रहे हैं जिनके जीवन में पूज्य बापूजी जैसे ब्रह्मज्ञानी संतों का सत्संग-सान्निध्य व मार्गदर्शन है और ॠषि प्रसादमासिक पत्रिका पूज्य बापूजी का आशीर्वाद व मार्गदर्शन प्राप्त करने का एक बहुत ही सुंदर और सुगम साधन है ।

अतः मैं सभी प्राध्यापकों, विशेषकर बापूजी द्वारा दीक्षित प्राध्यापकों से अनुरोध करती हूँ कि आप भी अपने स्कूल, कॉलेज, इंस्टीट्यूट में पढ़नेवाले विद्यार्थियों को ऋषि प्रसादका सदस्य बनायें व समाज के हर वर्ग तक बापूजी जैसे महापुरुष का संदेश पहुँचाकर अपने पद व योग्यता का सदुपयोग करें । पूज्य बापूजी के श्रीचरणों में मेरे कोटि-कोटि नमन !

- शांतिलता मिश्रा (डायरेक्टर)

आनंदीबाई कॉलेज ट्रस्ट, बोरीवली (मुंबई)

मो. : 09821882890