सूर्यग्रहण में रखें सावधानी व उठायें 10 करोड़ गुना लाभ

इस साल का भारत में दिखाई देनेवाला पहला और अंतिम सूर्यग्रहण 26 दिसम्बर को है । यह ग्रहण उत्तर भारत में खंडग्रास व दक्षिण भारत में कंकणाकृति के रूप में नजर आयेगा ।
इस समय धनु राशि पर शनि, केतु, बृहस्पति, सूर्य, चन्द्र और बुध विद्यमान होने से ‘षड्ग्रही योग’ है (कहीं प्लूटो सहित ‘सप्तग्रही’ योग भी बताया गया है) । शनि के मूल नक्षत्र, धनु राशि में दक्षिण-पश्चिम कोण को प्रभावित करने से भारी उलटफेर होगा । मूल नक्षत्र बृहस्पति की मूल त्रिकोण राशि धनु का हिस्सा है । यह गहन नक्षत्र है, जो आध्यात्मिक परिवर्तन की शुरुआत करता है । अतः इस ग्रहण में ध्यान, जप, पुण्यकर्म का विशेष महत्त्व है ।

कैसे उठायें 10 करोड़ गुना लाभ ?

भगवान वेदव्यासजी कहते हैं : ‘‘सामान्य दिन से सूर्यग्रहण में किया गया पुण्यकर्म दस लाख गुना फलदायी होता है । यदि गंगाजल पास में हो तो दस करोड़ गुना फलदायी होता है ।’’

जानिये सूर्यग्रहण-संबंधी महत्त्वपूर्ण बातें

(1) सूर्यग्रहण में ग्रहण-प्रारम्भ के चार प्रहर (12 घंटे) पूर्व से सूतक लगता है । सूतक व ग्रहण काल में भोजन नहीं करना चाहिए ।

(2) सूतक (ग्रहण-वेध) के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी-पत्ते डाल दिये जाते हैं, वे सूतक व ग्रहण काल में दूषित नहीं होते ।

(3) ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र या भगवन्नाम का जप अवश्य करें । इनका जप न करने से मंत्र को मलिनता प्राप्त होती है ।

(4) ग्रहण के समय ताला खोलना, सोना, मल-मूत्र का त्याग, मैथुन और भोजन - ये सब कार्य वर्जित हैं । गर्भवती महिला को तो ग्रहण के समय विशेष सावधानी से नियमों का पालन करना चाहिए ।

(विस्तृत जानकारी हेतु पढ़ें आश्रम की समितियों के सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध पुस्तक ‘क्या करें, क्या न करें ?’)

कुछ प्रमुख स्थानों के ग्रहण-समय

अहमदाबाद - 8-06 से - 10-53 तक
दिल्ली - 8-17 से - 10-58 तक
मुंबई व सूरत - 8-04 से - 10-56 तक
श्रीनगर - 8-22 से - 10-48 तक
जोधपुर - 8-09 से - 10-51 तक
लखनऊ - 8-19 से - 11-07 तक
भोपाल - 8-10 से - 11-03 तक
रायपुर (छ.ग.) - 8-14 से - 11-16 तक
देहरादून - 8-20 से - 10-58 तक
चंडीगढ़ - 8-19 से - 10-55 तक
राँची व पटना - 8-22 से - 11-23 तक
कोलकाता - 8-27 से - 11-33 तक
भुवनेश्वर - 8-19 से - 11-29 तक
चेन्नई - 8-08 से - 11-20 तक
बेंगलुरु, हैदराबाद - 8-06 से - 11-12 तक