14 जून 2018 को मुझे जोधपुर जेल में पूज्य बापूजी के दर्शन का लाभ मिला । मेरे सम्पर्क में देश-विदेश के कई साधक, भक्त हैं जो अपनी चिंता मेरे सामने रखते हैं कि ‘बापूजी कब बाहर आयेंगे ? कैसे आयेंगे ?...’ मैंने ये सभी सवाल पूज्यश्री के सामने रखे । बापूजी थोड़ी देर चुप हो गये, आँखें बंद कर लीं, फिर बोले : ‘‘मैं तुम सबके संकल्प से आ जाऊँगा । मैं प्रसन्न हूँ और ठीक हूँ ।’’

एक भाई ने पूछा : ‘‘बापूजी ! आप कैसे बाहर आयेंगे ?’’

पूज्यश्री : ‘‘तुम संकल्प करो, मैं बाहर आऊँगा ।’’

‘‘बापूजी ! आप जब से जेल में आये हैं, भक्तजन तभी से संकल्प कर रहे हैं ।’’

पूज्यश्री ने कहा : ‘‘मेरे सभी भक्त एक ही समय पर, एक साथ, एकजुट होकर संकल्प करेंगे तो मैं बाहर आ जाऊँगा ’’

‘‘बापूजी ! भक्त तो करोड़ों हैं ! सारे कैसे एकजुट होंगे ?’’

पूज्यश्री : ‘‘इकट्ठे नहीं होना है । अपनी-अपनी जगह पर रहकर एक साथ, एक ही समय संकल्प करेंगे तो मैं बाहर आ जाऊँगा । इसका पालन सभी साधक, भक्त करें ।’’

फिर बापूजी ‘नारायण... नारायण...’ कहते हुए हमें जाने का इशारा करके अंदर चले गये ।


छत्रपति शिवाजी महाराज के समय में हिरकणी नाम की एक महिला रायगढ़ किले का दरवाजा बंद होने से अंदर ही रह गयी थी । रात के घोर अँधेरे में किले के करीब 2700 फीट ऊँचे दुःसाध्य खड़े पहाड़ से नीचे उतरकर वह इस कारण घर पहुँच सकी क्योंकि उसने संकल्प किया था कि ‘मुझे अपने नन्हे बच्चे को दूध पिलाने जाना है ।’ अगले दिन वह स्वयं हैरान हुई कि ‘इतना ऊँचा पहाड़ मैं भला कैसे उतर गयी !’

जब एक माता अपने बच्चे को दूध पिलाने के लिए संकल्प करके इतना कठिन कार्य करने में सफल हो सकती है तो हम करोड़ों शिष्य, भक्त अपने बापूजी को जेल से बाहर लाने के सामूहिक संकल्प की पूर्ति में सफल क्यों नहीं हो सकते ?

- नीलम दुबे


हम सभीका एक ही लक्ष्य व संकल्प है कि हमें जल्द-से-जल्द पूज्य बापूजी के दर्शन-सान्निध्य का लाभ मिले । और इसकी पूर्ति का साधन भी बापूजी के श्रीमुख से हमें मिला है । बस, अब सभीका थोड़ा-सा सामूहिक प्रयास हो तो सफलता अवश्य मिलेगी ।

पूज्य बापूजी के सत्संग में आता है कि ‘‘जो भगवान के भक्त हैं, गुरु के भक्त हैं, सदाचारी और धर्मात्मा हैं उनके संकल्प में अच्छा-खासा बल होता है । जैसे - गांधीजी के संकल्प में बल था । उन्होंने ठान लिया कि ‘शोषक अंग्रेजों को देश से भगाना है ।’ किंतु सामने भी कोई अकेले व्यक्ति का नहीं वरन् कई अंग्रेजों का संकल्प था कि ‘भारत हमारे नियंत्रण में रहे ।’

इतने सारे लोगों के संकल्पों को काटना हो तो सामूहिक संकल्प चाहिए । गांधीजी समाज में पूर्णरूप से प्रचार में लग गये और रामनाम का आश्रय लेकर सबके संकल्प को एक माला के रूप में गूँथ लिया । साँईं लीलाशाहजी, स्वामी रामतीर्थ, स्वामी विवेकानंद, योगी अरविंद, देवराहा बाबा आदि महापुरुषों एवं सुभाषचन्द्र बोस, लोकमान्य तिलक, लाला लाजपतराय आदि क्रांतिकारियों ने भी देशवासियों में संकल्पशक्ति जगायी । आखिर उनका संकल्प फला । 1947 में अंग्रेज भारत छोड़कर चले गये यह दुनिया जानती है । संकल्प को काटनेवाले विकल्प न हों तो संकल्प में अद्भुत सामर्थ्य आता है ।’’

सिंधी भाइयों की सामूहिक पुकार पर हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए झूलेलालजी का अवतरण, मद्रास के भीषण अकाल में श्री राजगोपालाचार्य द्वारा करायी गयी सामूहिक प्रार्थना के फलस्वरूप मूसलधार वर्षा होना आदि प्रसंग हम सबने सत्संग में सुने ही हैं, जिनसे सामूहिक प्रार्थना, संकल्प की महिमा सुस्पष्ट हो जाती है ।


एक साथ, एक ही समय पर महासंकल्प 

अहमदाबाद आश्रम में रोज सुबह-शाम सामूहिक संकल्प व जप किया जा रहा है ।

संकल्प : हम सभी सामूहिक संकल्प करते हैं कि आशारामजी बापू शीघ्र रिहा हों ।

मंत्र : ॐ ॐ ॐ बापू जल्दी बाहर आयें  

भारत देश के भक्त सुबह 7.21 से 7.36 बजे तक व शाम 7.45 से 8 बजे तक संकल्प-जप करें । विदेश के भक्त अपने-अपने स्थानीय (Local) सुबह 7.21 से 7.36 बजे तक व शाम 7.45 से 8 बजे तक संकल्प-जप करें ।

अपने-अपने घरों में या दुकान, कार्यालय अथवा यात्रा में - जहाँ पर भी हों, नियत समय पर उपरोक्त संकल्प-जप अवश्य करें । इसके अलावा भी जब भी सुमिरन हो, इसे करें ।

क्या हम बापूजी का सत्संग-सान्निध्य पाने के लिए इतना नहीं कर सकते ? जरूर करेंगे तथा अपने क्षेत्र के अन्य भक्तों को भी इस हेतु प्रेरित करेंगे ।